सूरमा' बनने के लिए एक्टर दिलजीत दोसांझ ने रोज 12 घंटे खेली हॉकी, सिक्स पैक एब्स भी बनाए

संदीप सिंह को 22 अगस्त 2006 को ट्रेन में सफर के दौरान गोली लगी थी। तब वे नेशनल टीम के साथ हॉकी वर्ल्डकप जाने वाले थे।

बॉलीवुड डेस्क. एक्टर-सिंगर दिलजीत दोसांझ को पंजाबी फूड बेहद पसंद है, लेकिन 'सूरमा' के लिए दिलजीत ने खाना छोड़ कर एथलीट जैसी बॉडी बनाने काफी मेहनत की थी। दिलजीत ने खुद को पूरी तरह से एथलीट में बदल लिया था। दिनचर्या से लेकर डाइट तक और संदीप का सिग्नेचर हॉकी मूव सीखने संदीप ने रोजाना 12 घंटों तक हाॅकी के मैदान में पसीना बहाया है। खुद संदीप सिंह ने दिलजीत को ट्रेनर के तौर पर अपनी तरह हाॅकी खेलने की ट्रेनिंग दी। दिलजीत के ट्रांसफॉर्मेशन को उनकी पुरानी फोटोज में देखा जा सकता है।

कम किया खाना और ली एथलीट डाइट: दिलजीत काे खाने का बहुत शौक है। पंजाबी सिग्नेचर फूड जिसमें ऑइली खाना होता है। उसे पूरी तरह छोड़कर एथलीट वाली हेल्दी डाइट ली। जिमिंग और वर्कआउट के जरिए सिक्स पैक एब्स भी बनाए।

12 घंटे मैदान पर की प्रैक्टिस : संदीप की तरह ड्रैग फ्लिकर बनने के लिए दिलजीत ने एक महीने तक रोजाना हॉकी स्टिक पकड़ने, मैदान में खड़े होने, शॉट लगाने और ड्रैग फ्लिक करने की प्रैक्टिस की। संदीप खुद दिलजीत को 12 घंटे, अंगद को 3 घंटे और तापसी पन्नू को भी 4-5 घंटे तक हॉकी की प्रैक्टिस करवाते थे। दिलजीत ने सुबह जल्दी उठने और सोने का रुटीन बनाया।

- रूटीन फॉलो करते हुए वे पूरी शूटिंग के दौरान जल्दी सोया करते थे और सुबह जल्दी उठकर हॉकी की प्रैक्टिस करने निकल जाते थे।

- दिलजीत ने संदीप के मैचेस और इंटरव्यू देखते हुए उनकी तरह बोलने और चलने की ट्रेनिंग ली।

परिवार और दोस्तों के साथ बिताया वक्त : दिलजीत ने संदीप के भाई विक्रमजीत, पिता गुरचरन सिंह और मां दलजीत कौर के अलावा उनके दोस्तों के साथ भी लम्बा समय बिताया है। फिल्म में उनके परिवार की बॉन्डिंग को दिखाने कई हफ्ते उनके घर में रहे हैं। लगभग 4 महीने संदीप और दिलजीत ने साथ वक्त बिताया था।

- पिछले दिनों दिलजीत, संदीप सिंह के घर भी गए, जहां उनके पिता ने वही हॉकी गिफ्ट की जिससे संदीप ने कई गोल किए हैं।

- संदीप ने भी बायोपिक रिलीज से पहले उस हॉस्पिटल गए, जहां उनका इलाज हुआ। साथ ही 12 साल बाद उसी ट्रेन में सफर किया जिसमें उन्हें गोली लगी थी।

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